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Mahalaxmi Vrat Katha in Hindi and English – Story of 16 Day Goddess Lakshmi Vrat

Mahalaxmi Vrat Katha is based on an incident supposed to have happened in the Mahabharata. Story of 16 Day Goddess Lakshmi Vrat is listened to by women performing the puja. You can read the story in Hindi and English below:

Mahalaxmi Vrat Katha
Gandhari, the queen of Hastinapura and mother of Kauravas, decided to perform the 16 Day Goddess Lakshmi Vrat. Gandhari performed the vrat and offered food to the royal elephants to show her might and influence. She purposefully did not invite Kunti, mother of Pandavas, for the ceremony.

On the main puja day, the 100 Kauravas made a beautiful life-size clay elephant and placed in the middle of the palace courtyard.

All women in the palace went to attend the puja of Gandhari.

Kunti was saddened by this behavior of Gandhari.

Arjuna who came to know about this brought Airavatha (Indira’s white elephant) to earth, through a ladder made of arrows. On hearing about the arrival of Airavatha, all the women abandoned Gandhari’s puja and went to participate in the puja of Kunti.

All the women were happy to participate in the puja in which Gajalakshmi’s elephant Airavata was present.

The women then offered 16 different types of food to Goddess Lakshmi and Airavata.
महालक्ष्मी व्रत कथामहालक्ष्मी व्रत पौराणिक काल से मनाया जा रहा है। शास्त्रानुसार महाभारत काल में जब महालक्ष्मी पर्व आया। 
उस समय हस्तिनापुर की महारानी गांधारी ने देवी कुन्ती को छोड़कर नगर की सभी स्त्रियों को पूजन का निमंत्रण दिया। 
गांधारी के 100 कौरव पुत्रों ने बहुत सी मिट्टी लाकर सुंदर हाथी बनाया उसे महल के मध्य स्थापित किया। जब सभी स्त्रियां पूजन हेतु गांधारी के महल में जाने लगी। इस पर देवी कुन्ती बड़ी उदास हो गई। 
इस पर अर्जुन ने कुंती से कहा हे माता! आप लक्ष्मी पूजन की तैयारी करें, मैं आपके लिए जीवित हाथी लाता हूं। अर्जुन अपने पिता इंद्र से स्वर्गलोक जाकर ऐरावत हाथी ले आए। कुन्ती ने सप्रेम पूजन किया। जब गांधारी कौरवों समेत सभी ने सुना कि कुन्ती के यहां स्वयं एरावत आए हैं तो सभी ने कुंती से क्षमा मांगकर गजलक्ष्मी के ऐरावत का पूजन किया। 
शास्त्रनुसार इस व्रत पर महालक्ष्मी को 16 पकवानों का भोग लगाया जाता है। सोलह बोल की कथा 16 बार कहे जाने का विधान है कथा के बाद चावल या गेहूं छोड़े जाते हैं।

सोलह बोल की कथा:"अमोती दमो तीरानी, पोला पर ऊचो सो परपाटन गांव जहां के राजा मगर सेन दमयंती रानी, कहे कहानी। सुनो हो महालक्ष्मी देवी रानी, हम से कहते तुम से सुनते सोलह बोल की कहानी॥"